पूर्व अफगान महिला सैनिक भूमिगत रहने को मजबूर

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] • 1 Years ago
पूर्व अफगान महिला सैनिक भूमिगत रहने को मजबूर

काबुल. ‘मुझे लगता है कि मैं जेल में हूँ. मुझे घर पर ही रहना पड़ता है और मैं बाहर नहीं जा सकती. मैं बहुत भयभीत हूं. मुझे डर है कि तालिबान मुझे ढूंढ़कर मार डालेगा.’ यह कहना है 28 वर्षीय जमीला का, जिन्होंने हेरात प्रांत में अफगान नेशनल आर्मी मुख्यालय की 207वीं कोर में 10 वर्षों तक सेवा की. अपने जीवन के लिए खतरों के कारण वह अपना असली नाम बताना नहीं चाहती हैं.

पिछले साल अगस्त में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद, कब्जे से पहले अफगान सेना में सेवा करने वाली महिलाएं बता रही हैं कि तालिबान शासित देश में उनका जीवन कैसे नाटकीय रूप से बदल गया है. अफगानिस्तान में 6,300 से अधिक महिलाओं ने पूर्व अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों में सेवा की, जिनका जीवन न केवल पूर्व सैन्य कर्मियों के रूप में खतरे में है, बल्कि तालिबान ने महिलाओं पर प्रतिबंध भी लगा दिए हैं.

जमीला ने कहा कि उन्हें अब इस बात की कोई उम्मीद नहीं थी कि स्थिति बदलेगी और उन्हें नहीं लगता कि तालिबान के शासन में अफगान महिला सैनिकों का कोई भविष्य है. तालिबान ने महिलाओं पर काम करने, माध्यमिक शिक्षा और लंबी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने सहित सख्त प्रतिबंध लगाए हैं.

नवंबर में, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच और संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान पर 100 से अधिक पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की हत्या करने का आरोप लगाया. हालांकि तालिबान ने सामान्य माफी का दावा किया था. जमीला ने कहा कि तालिबान के वरिष्ठ नेताओं द्वारा घोषित आम माफी के बावजूद तालिबान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.

गौरतलब है कि देश के 300,000 सुरक्षा बलों में शामिल 6,300 से अधिक महिलाओं की भागीदारी रूढ़िवादी समाज में एक बड़ा बदलाव था.

अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी एजेंसी सिगार की जुलाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस बल में 4,253 महिलाएं, सेना में 1,913 और वायु सेना में 146 महिलाएं थीं.

जमीला ने कहा कि वह अब एक जगह से दूसरी जगह जाती रहती हैं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके. दो बच्चों की मां जमीला के मुताबिक, उनके परिवार ने उनके एएनडीएसएफ में शामिल होने का विरोध किया था और अब उनका परिवार उन्हें कसूरवार ठहरा रहा है.

उन्होंने कहा कि उनके परिवार वाले उससे कह रहे थे कि तुम सेना का हिस्सा हो और इसलिए अब उनकी जान को खतरा है. ऐसा माना जाता है कि तालिबान के काबुल पर कब्जा करने से पहले, कई महिलाओं, सरकारी अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया था.

अफगान प्रांत हेरात में तैनात एक 25 वर्षीय पूर्व अफगान महिला सैन्य अधिकारी ने कहा कि उनके पास पाकिस्तान भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

उन्होंने कहा कि वह काबुल पर कब्जा करने के बाद दूसरे परिवार के साथ पाकिस्तान गई थीं. उनके अनुसार, जो महिलाएं सेना का हिस्सा थीं, वे अब खतरे में हैं और तालिबान उन्हें मारना चाहते हैं. उनके अनुसार, वह अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए कोई भविष्य नहीं देखती हैं. उन्होंने कहा, ‘इस विचार से छुटकारा पा लें कि तालिबान महिलाओं को काम पर जाने देगा.’

(वॉयस ऑफ अमेरिका)

पूर्व अफगान महिला सैनिक भूमिगत रहने को मजबूर

काबुल. ‘मुझे लगता है कि मैं जेल में हूँ. मुझे घर पर ही रहना पड़ता है और मैं बाहर नहीं जा सकती. मैं बहुत भयभीत हूं. मुझे डर है कि तालिबान मुझे ढूंढ़कर मार डालेगा.’ यह कहना है 28 वर्षीय जमीला का, जिन्होंने हेरात प्रांत में अफगान नेशनल आर्मी मुख्यालय की 207वीं कोर में 10 वर्षों तक सेवा की. अपने जीवन के लिए खतरों के कारण वह अपना असली नाम बताना नहीं चाहती हैं.

पिछले साल अगस्त में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद, कब्जे से पहले अफगान सेना में सेवा करने वाली महिलाएं बता रही हैं कि तालिबान शासित देश में उनका जीवन कैसे नाटकीय रूप से बदल गया है. अफगानिस्तान में 6,300 से अधिक महिलाओं ने पूर्व अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों में सेवा की, जिनका जीवन न केवल पूर्व सैन्य कर्मियों के रूप में खतरे में है, बल्कि तालिबान ने महिलाओं पर प्रतिबंध भी लगा दिए हैं.

जमीला ने कहा कि उन्हें अब इस बात की कोई उम्मीद नहीं थी कि स्थिति बदलेगी और उन्हें नहीं लगता कि तालिबान के शासन में अफगान महिला सैनिकों का कोई भविष्य है. तालिबान ने महिलाओं पर काम करने, माध्यमिक शिक्षा और लंबी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने सहित सख्त प्रतिबंध लगाए हैं.

नवंबर में, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच और संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान पर 100 से अधिक पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की हत्या करने का आरोप लगाया. हालांकि तालिबान ने सामान्य माफी का दावा किया था. जमीला ने कहा कि तालिबान के वरिष्ठ नेताओं द्वारा घोषित आम माफी के बावजूद तालिबान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.

गौरतलब है कि देश के 300,000 सुरक्षा बलों में शामिल 6,300 से अधिक महिलाओं की भागीदारी रूढ़िवादी समाज में एक बड़ा बदलाव था.

अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी एजेंसी सिगार की जुलाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस बल में 4,253 महिलाएं, सेना में 1,913 और वायु सेना में 146 महिलाएं थीं.

जमीला ने कहा कि वह अब एक जगह से दूसरी जगह जाती रहती हैं, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके. दो बच्चों की मां जमीला के मुताबिक, उनके परिवार ने उनके एएनडीएसएफ में शामिल होने का विरोध किया था और अब उनका परिवार उन्हें कसूरवार ठहरा रहा है.

उन्होंने कहा कि उनके परिवार वाले उससे कह रहे थे कि तुम सेना का हिस्सा हो और इसलिए अब उनकी जान को खतरा है. ऐसा माना जाता है कि तालिबान के काबुल पर कब्जा करने से पहले, कई महिलाओं, सरकारी अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया था.

अफगान प्रांत हेरात में तैनात एक 25 वर्षीय पूर्व अफगान महिला सैन्य अधिकारी ने कहा कि उनके पास पाकिस्तान भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

उन्होंने कहा कि वह काबुल पर कब्जा करने के बाद दूसरे परिवार के साथ पाकिस्तान गई थीं. उनके अनुसार, जो महिलाएं सेना का हिस्सा थीं, वे अब खतरे में हैं और तालिबान उन्हें मारना चाहते हैं. उनके अनुसार, वह अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए कोई भविष्य नहीं देखती हैं. उन्होंने कहा, ‘इस विचार से छुटकारा पा लें कि तालिबान महिलाओं को काम पर जाने देगा.’

(वॉयस ऑफ अमेरिका)