आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
डिजिटल दौर में प्रौद्योगिकी ने हमारा दैनिक जीवन काफी आसान कर दिया है। अब लोग अपने स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से ईमेल भी आसानी से लिख सकते हैं।
लेकिन न्यूजीलैंड के कई बुजुर्गों के लिए तेजी से प्रगति करती प्रौद्योगिकी ने अवसरों के दरवाजे खोलने के बजाय एक दीवार खड़ी कर दी है। ऑनलाइन फॉर्म भरना, बार-बार बदलते ऐप इस्तेमाल करना, ऑफलाइन सेवाओं का कम होना और ऑनलाइन ठगी का लगातार खतरा उनके लिए कठिन हो सकता है।
इस परेशानी के लिए एक शब्द है - "टेक्नोस्ट्रेस" (प्रौद्योगिकीय तनाव)। पहले इसका इस्तेमाल कामकाजी लोगों में प्रौद्योगिकी से होने वाली चिंता और परेशानी के लिए किया जाता था, लेकिन अब इसका उपयोग उन बुजुर्गों के लिए भी होने लगा है जो डिजिटल दुनिया में खुद को पीछे छूटा हुआ महसूस करते हैं।
हालांकि समय के साथ बुजुर्गों के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ा है, फिर भी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग आधे लोगों को लगता है कि आधुनिक प्रौद्योगिकी में वे पीछे छूट रहे हैं।
सरकारी सेवाओं को और अधिक डिजिटल बनाने की योजना के बीच, 60 वर्ष से अधिक उम्र के 40 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को सरकारी ऑनलाइन जानकारी हासिल करने में परेशानी होती है।
बुजुर्गों के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है ताकि वे जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकें और सामाजिक संबंध बनाए रख सकें। इसके बिना उनके मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक, शारीरिक व आर्थिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हाल ही में प्रकाशित हमारे शोध में 65 वर्ष से अधिक उम्र के 23 लोगों से बातचीत की गई। इससे पता चला कि प्रौद्योगिकी के साथ उनका संबंध काफी जटिल है। प्रौद्योगिकी एक ओर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, तो दूसरी ओर तनाव व अलगाव का कारण भी बनी है।