आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
असम विधानसभा में सत्तारूढ़ राजग का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों ने बुधवार को कहा कि दो दिन पहले सदन में पेश किया गया समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से है और यह किसी धर्म या धार्मिक प्रथा के खिलाफ नहीं है।
विधायकों ने सदन में इस प्रस्तावित कानून को एक ऐतिहासिक कदम बताया और जोर देकर कहा कि राज्य के जनजातीय समुदायों को इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे उनकी पारंपरिक कानून व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।
राजग विधायक नयी विधानसभा के पहले सत्र के अंतिम दिन इस विधेयक पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे, जिसे पारित करने के लिए सदन में रखा गया है।
भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पीयूष हजारिका ने सभी वर्गों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की और दावा किया कि यह “किसी धर्म या धार्मिक प्रथा के खिलाफ नहीं है।”
असम सरकार ने सोमवार को यूसीसी विधेयक सदन में प्रस्तुत किया था, जिसका उद्देश्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करना है।
हालांकि, विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यह असम में रहने वाले अनुसूचित जनजाति (अजा) समुदायों पर यह लागू नहीं होगा।
इसमें कई दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें द्विविवाह या बहुविवाह के लिए सात साल की जेल और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण न कराने पर तीन महीने की सजा शामिल है।