आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
Delhi University में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद के दिन परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जो छात्र बकरीद मनाना चाहते हैं, उनकी 28 मई को निर्धारित परीक्षाएं स्थगित कर दी जाएंगी। ऐसे छात्रों की परीक्षा अब 4 जुलाई को आयोजित की जाएगी।
मंगलवार (26 मई, 2026) को हाईकोर्ट में दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि इच्छुक छात्र लॉ फैकल्टी के डीन को इसकी जानकारी दें। इसके बाद उनकी परीक्षा नई तारीख पर आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि छात्रों को परीक्षा की संशोधित तारीख की सूचना कम से कम एक सप्ताह पहले दे दी जाएगी, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों और शिक्षकों ने ईद-उल-अजहा के दिन परीक्षा आयोजित किए जाने के फैसले का विरोध किया था। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि 28 मई को होने वाली परीक्षाओं को आगे बढ़ाया जाए, जिससे मुस्लिम छात्र, शिक्षक और कर्मचारी बिना किसी दबाव के धार्मिक त्योहार मना सकें।
इससे पहले सोमवार को विश्वविद्यालय की जनरल ब्रांच-2 की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया था कि 28 मई को ईद-उल-अजहा के अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी कार्यालय, विभाग, कॉलेज और संस्थान बंद रहेंगे। हालांकि, अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया था कि परीक्षाएं तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी। इसी फैसले को लेकर विवाद गहरा गया था।
Delhi University Teachers' Association (DUTA) के कई सदस्यों ने कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर परीक्षाएं स्थगित करने की मांग की थी। शिक्षकों ने अपने पत्र में कहा कि हजारों मुस्लिम छात्र, शिक्षक और कर्मचारी ईद से जुड़े धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाएंगे, जिससे उन्हें मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व पर परीक्षाएं आयोजित करना संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की थी कि छात्रों और कर्मचारियों को बिना परीक्षा के दबाव के त्योहार मनाने का अवसर दिया जाए।
वहीं, All India Students Association (AISA) ने भी विश्वविद्यालय के फैसले की आलोचना की। छात्र संगठन ने इसे असंवेदनशील और बहिष्कार योग्य बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
अब हाईकोर्ट में विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद बकरीद मनाने वाले छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।