जुलाई-सितंबर तिमाही में घट सकती हैं भर्ती गतिविधियांः रिपोर्ट

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-06-2026
Recruitment activities may decline in the July-September quarter: Report
Recruitment activities may decline in the July-September quarter: Report

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
भारत में कॉरपोरेट क्षेत्र की भर्तियों में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान गिरावट आने का अनुमान है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कंपनियां अब भर्ती को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही हैं। मंगलवार को एक सर्वे रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
 
मैनपावरग्रुप की नवीनतम ‘रोजगार परिदृश्य सर्वे’ रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर, 2026 तिमाही के लिए शुद्ध रोजगार परिदृश्य (एनईओ) 48 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछली तिमाही की तुलना में 20 अंक कम है लेकिन पिछले साल की समान अवधि से छह प्रतिशत अंक अधिक है।
 
एनईओ की गणना भर्ती बढ़ाने और घटाने की योजना रखने वाले नियोक्ताओं के प्रतिशत के अंतर के आधार पर की जाती है।
 
भारत में 3,100 से अधिक नियोक्ताओं के बीच कराए गए सर्वे में आर्थिक अनिश्चितता को भर्ती में नरमी का प्रमुख कारण बताया गया है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी एक बड़ा कारण रहा।
 
मैनपावरग्रुप के प्रबंध निदेशक (भारत एवं पश्चिम एशिया) संदीप गुलाटी ने कहा, ‘‘भारत में जुलाई-सितंबर, 2026 तिमाही के लिए भर्ती परिदृश्य वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत बना हुआ है। इस अवधि में शुद्ध रोजगार परिदृश्य 48 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो दर्शाता है कि जटिल होते कारोबारी माहौल के बावजूद नियोक्ताओं का देश की वृद्धि संभावनाओं पर भरोसा कायम है।’’
 
सर्वे के अनुसार, कुछ कंपनियां अभी भी कार्यबल में विस्तार की योजना बना रही हैं, जबकि कई कंपनियां आर्थिक दबाव और वैश्विक अस्थिरता के कारण कर्मचारियों की संख्या में कटौती पर विचार कर रही हैं।
 
क्षेत्रवार स्तर पर उपयोगिता एवं प्राकृतिक संसाधन, वित्त और बीमा, निर्माण एवं रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा क्षेत्रों में भर्ती की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।
 
गुलाटी ने कहा, ‘‘कंपनियां अब सिर्फ भर्ती पर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के कौशल विकास, संचार क्षमता, टीमवर्क और अनुकूलन क्षमता पर अधिक ध्यान दे रही हैं, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार किया जा सके।’’
 
रिपोर्ट के मुताबिक, कृत्रिम मेधा (एआई) उत्पादकता और कार्यबल को लेकर कंपनियों की सोच को प्रभावित कर रही है। लेकिन सितंबर तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि नियोक्ता एआई को अभी काम पूरी तरह से सौंपने के लिए तैयार नहीं हैं।