आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य के दो रक्षा कर्मियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाना मणिपुर के लोगों के लिए गर्व की बात है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मणिपुर के रहने वाले 11 पैरा (विशेष बल) के मेजर लीशांगथेम दीपक सिंह और 3 असम राइफल्स के राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई को ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस, अद्वितीय वीरता और व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना कर्तव्य निभाने के लिए सोमवार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रक्षा बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस बलों के कर्मियों को सात कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र प्रदान किए।
शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मेजर लीशांगथेम को बधाई देते हुए कहा, ‘‘उनका साहस, पेशेवर दक्षता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण मणिपुर के लिए अत्यंत गर्व का विषय है तथा युवा भारतीयों की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।’’
सिंह ने मेजर लीशांगथेम की वीरता और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सलाम किया।
उन्होंने वैफेई को भी ‘‘घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस, सामरिक कौशल और विशिष्ट सेवा’’ के लिए बधाई दी। वैफेई मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के निवासी हैं।
मुख्यमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘उनकी वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण मणिपुर के लिए अत्यंत गर्व का विषय है तथा हमारे युवाओं को सम्मान, प्रतिबद्धता और देशभक्ति के साथ सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।’’
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मणिपुर इकाई की अध्यक्ष अधिकारीमयूम शारदा देवी ने पार्टी की ओर से कहा कि मणिपुर के इन दोनों वीर सपूतों ने ‘‘असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा’’ का परिचय दिया है।