आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कंगना रनौत का कहना है कि महिला अभिनेत्रियों को अगर फिल्म में कोई दृश्य सही नहीं लग रहा है तो वे अपनी राय साझा कर सकती हैं और निर्देशक भी शायद इस बात को स्वीकार करेंगे की बंद कमरे में बैठकर कहानी लिखने वाले पुरुषों को तब यह (दृश्य) शायद ‘इतना बुरा’ नहीं लगा था।
अभिनेत्री-राजनेता कंगना रनौत की ये टिप्पणियां सिनेमा में महिलाओं को प्रदर्शन की वस्तु बनाकर पेश करने के मुद्दे पर जारी विवाद के बीच आई हैं।
जाह्नवी कपूर और राम चरण अभिनीत फिल्म ‘पेड्डी’ के कुछ दृश्यों को लेकर कई हलकों में आक्रोश फैल गया है।
अपनी नयी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ का प्रचार कर रही रनौत के अनुसार, फिल्म निर्माण का मतलब ही है विभिन्न दृष्टिकोणों का एक साथ आना।
कंगना ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “आप किसी दृश्य को लेकर अपनी बात उठा सकती हैं और कह सकती हैं, ‘यह कुछ इस तरह लग रहा है।’ वे शायद इस तरह फिल्मांकन नहीं करना चाहेंगे क्योंकि कोई भी ऐसी फिल्म नहीं बनाना चाहता जिसमें वे कहें कि चलो महिलाओं को आकर्षक वस्तु के रूप में पेश करें। मैंने देखा है कि वे ऐसा नहीं सोचते...।”
उन्होंने कहा, ‘‘एक महिला होने के नाते, आप अपनी राय रख सकती हैं और कह सकती हैं कि यह (दृश्य) मुझे इस तरह का महसूस होता है या यह अच्छा नहीं लग रहा है। ज्यादातर लोग आपसे सहमत हो जाते हैं और कहते हैं, ‘ हमने इसे उस नजरिये से सोचा ही नहीं था। जब हम पुरुष बंद कमरे में बैठकर इसे लिख रहे थे, तो हमें नहीं लगा कि यह इतना गलत होगा। ऐसी चीजें होती हैं। अगर आप किसी फिल्म में काम कर रहे हैं और आपने उसे स्वीकार कर लिया है, तो यह एक तरह का सहयोग होता है।”