जामिया मिल्लिया इस्लामिया में उर्दू विभाग के 50 साल पूरे होने पर उत्सव, आगे क्या ?

Story by  मोहम्मद अकरम | Published by  [email protected] • 2 Months ago
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में उर्दू विभाग के 50 साल पूरे होने पर उत्सव, आगे क्या ?
मोहम्मद अकरम /नई दिल्ली

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग के 50 साल पूरा होने पर जश्न का माहौल है. जामिया उर्दू बिरादरी में खुिशयां मनाई जा रही हैं. इसे यादगार बनाने के लिए जामिया के कैंपस में कई तरह के प्रोग्राम आयोजित किया गया. 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 1920 में स्थापना के समय से ही उर्दू भाषा पर विशेष ध्यान दिया गया,लेकिन 25 नवंबर 1972 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में लंबे संघर्ष के बाद औपचारिक रूप से उर्दू विभाग की स्थापना की गई. 
 
दो दिवसीय प्रोग्राम के पहले दिन उर्दू विभाग के छात्रों के साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठन बज्म ए जामिया के द्वारा आयोजित प्रदर्शनी उर्दू विभागः आधी सदी की कहानी, तस्वीरों की जुबानी, का उद्घाटन प्रो. मोहम्मद असदुद्दीन द्वारा किया गया. 
 
दूसरे रोज सीआईटी हाल में आयोजित  उर्दू विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 50 साल प्रोग्राम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जामिया के पूर्व कुलपति सैयद शाहिद मेहदी और राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के डायरेक्टर शेख अकील अहमद, जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. नाजिम हुसैन जाफरी समेत दूसरे मेहमानों ने शिरकत की.
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किन लोगों के संघर्ष से उर्दू विभाग की स्थापना हुई मुमकिन ?

इस सवाल के बारे में जामिया के उर्दू विभाग के प्रो. कौशर मजहरी बताते हैं कि जामिया की स्थापना के वक्त से ही उर्दू की पढ़ाई हो रही थी. मगर औरचारिक तौर से उर्दू विभाग को लाने में जिन लोगों ने काम किया उनमें कैंसर जैदी, प्रो. मोहम्मद मुजीब, मशहूर साहित्यकार गोपी चंद नारंग, तनवीर अहमद अल्वी, प्रो. मोहम्मद जाकिर, अजीमुशान सिद्दीकी, प्रो. उनवान चिश्ती, प्रो. हनीफ कैफी आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 
 
50 साल का जश्न मना रहे हैं आगे क्या?

उर्दू विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पचास साल पूरे करने पर सैयद शाहिद मेहदी ने उर्दू को घर-घर पहुंचाने और इसके लिए जमीन पर काम करने पर जोर दिया.
 
उन्होंने आगे कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने उर्दू विभाग के बनने से पहले उर्दू के हवाले से जो काम किया है उसे भुलाया नहीं जा सकता. अंजुमन तरक्की उर्दू के बाद जामिया ने साहित्य (अदब) से बाहर निकल कर काम किया है. उसको याद करना, विस्तार करना जरूरी है. उन्होंने आगे कहा कि आप पचास साल का जश्न मना रहे हैं आगे क्या?
 
उन्होंने जामिया मकतबा की मौजूदा सूरत ए हाल पर अफसोस करते हुए कहा कि ये अपने मूल कार्य को भूल गया है. 
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हम हुकुमत से सवाल नहीं कर सकते

उर्दू की मौजूदा हालात पर सैयद शाहिद मेंहदी ने कहा कि हम हुकुमत (सरकार) से सवाल नहीं करते. इस समय सबसे ज्यादा काम उर्दू के लिए राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद काम कर रहा है.
 
इस तरह का काम उर्दू के फरोग के लिए पाकिस्तान मे भी नहीं हो रहा है. उर्दू को जामिया के अंदर उर्दू विभाग तक सीमित नहीं रखना चाहिए. 
 
akeelभविष्य में उर्दू विभाग उच्च स्थान हासिल करेगा

राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के डायरेक्टर डा. शेख अकील अहमद ने ’आवाज द वॉयस से बात करते हुए कहा कि पिछले पचास सालों में जामिया के साथ, जामिया के उर्दू विभाग ने भी काफी तरक्की की है.
 
इस विभाग में एक से बढ़ कर एक उर्दू के आफताब व महताब आए. अभी भी जो उर्दू के शिक्षक हैं वह सफ ए अव्वल (पहली पंक्ति) के आलिम और फाजिल हैं. उम्मीद है कि आने वाले समय में ये विभाग और आला मुकाम हासिल करेगा.
 
आज जामिया उन्ही लोगों की कोशिशों से पूरे हिन्दुस्तान में तीसरे नंबर पर है. मैं जामिया की वाइस चांसलर, जामिया उर्दू विभाग के अध्यक्ष को मुबारकबाद पेश करता हूं. 
 
 हमें इस पर गर्व है

 वहीं उर्दू विभाग से पीएचडी कर रहीं आसिफा जैनब बताती हैं कि जामिया का उर्दू विभाग का जो माहौल है वह बहुत ही अच्छा है. जिस तरह से उर्दू विभाग तरक्की कर रहा है, उम्मीद है कि आगे भी इससे बेहतर करेगा.
 
यहां के शिक्षक इसके लिए कोशिश कर रहे हैं. इंशाअल्लाह आगे मजीद (और ज्यादा) बढ़ेगा. पूरे भारतवर्ष में सबसे बेहतर उर्दू विभाग जामिया का है. हमें इस पर फख्र है. 
 
noushadउर्दू विभाग में पत्रकारिता शुरू किया जाए

जामिया गेस्ट फेक्लटी के उस्ताद नौशाद मंजर कहते हैं कि अभी जिस तरह से सहाफत (पत्रकारिता) का मैदान तैयार है, हमारे यहां कोर्स होता है, उसे और ज्यादा बेहतर करने की आवश्यकता है.
 
जिस तरह से हिन्दी पत्रकारिता में टीवी में पत्रकारिता होता है, उर्दू विभाग में भी शुरू किया जाए. गेस्ट फैकल्टी की संख्या बढ़ाने की जरूरत है. जैसे जेएनयू में मास मीडिया का कोर्स होता हैं शाम में, उसी तरह जामिया में भी पार्ट टाइम कोर्स हो. 
 
इस बात की शिकायत

प्रोग्राम में शामिल कुछ छात्रों का इस बात की शिकायत थी के मंच से बहुत सारे लोगों का नाम लिया गया लेकिन छात्रों के काम के लिए हमेशा आगे रहने वाले विभाग के क्लर्क जय राम शती और अख्तर अहमद का नाम नहीं लेने पर अफसोस है.